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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 7
गोजिह्वासंस्थानो नीलोत्पलवंशपत्रसदृशश्च । करवीरपत्रशूलाग्रमण्डलाग्राः प्रशस्ताः स्युः ॥
गाय के जीभ के समान आकृति वाला, नीलकमलदल के सदृश, बाँस के पत्रसदृश, करवीर फूल के पत्रसदृश, शूल की तरह अग्र भाग वाला और वर्तुलाकार अग्र भाग बाला खड्ग प्रशस्त होता है।
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