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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 5
क्वणितं मरणायोक्तं पराजयाय प्रवर्तनं कोशात् । स्वयमुहीणें युद्धं ज्वलिते विजयो भवति खड्गे ॥
खड्ग से अचानक शब्द हो तो मरण, म्यान से नहीं निकलता हो तो पराजय, म्यान से अपने-आप निकल जाय तो युद्ध और अनायास खड्ग प्रज्ज्वलित हो जाय तो विजय होती है।
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