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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 3
कृकलासकाककङ्कक्रव्यादकबन्धवृश्चिकाकृतयः खड्गे व्रणा न शुभदा वंशानुगताः प्रभूताश्च ॥
गिरगिट, काक, गिद्ध, मांसभोजी पक्षी, विना शिर के पुरुष और बिच्छू की आकृति का जण शुभ नहीं होता है तथा वंश (खड्ग के उच्च भाग में) अनुगत ( स्थित ) नाना आकृति वाले व्रण भी शुभ नहीं होते हैं।
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