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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 26
क्षारे कदल्या मथितेन युक्ते दिनोषिते पायितमायसं यत् । सम्यक् शितं चाश्मनि नैति भङ्ग न चान्यलोहेष्वपि तस्य कौण्ठ्यम् ॥
केले की राख में मठ्ठा मिलाकर उसमें एक अहोरात्र तक लोहे को छोड़ दे, बाद में उसको निकाल कर तेज बन्न, फिर उससे पत्थर या अन्य लोहे पर भी मारे तो वह नहीं टूटता है।
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