मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 25
आर्क पयो हुडुविषाणमधीसमेतं पारावताखुशकृता च युतः प्रलेपः। शस्त्रस्य तैलमथितस्य ततोऽस्य पानं पश्चाच्छितस्य नै शिलासु भवेद्विघातः ॥
शत्र पर तिल का तेल मलने के बाद आक के वृक्ष के गोंद और मेष के सींग के भस्म से मिली हुई कबूतर और चूहे को बोट को उसके ऊपर लेप करे, बाद में तेज करके उससे पत्थर पर भी मारे तो वह नहीं टूटता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें