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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 24
बडवोष्ट्रकरेणुदुग्धपानं यदि पापेन समीहतेऽर्थसिद्धिम् । झषपित्तमृगाश्ववस्तदुग्धैः करिहस्तच्छिदये सतालगर्भेः ॥
ऊंटनी, हथिनी के दूध से और हाथी के शुण्ड काटने की इच्छा बाले ताड़ के रस (जादी) से मिश्रित मछली के पित्त तथा हरिणों, घोड़ी या छाग के दूध से शव को पान देवे ।
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