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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 23
इदमौशनसं च शस्त्रपानं रुधिरेण श्रियमिच्छतः प्रदीप्ताम् । हविषा गुणवत्सुताभिलिप्सोः सलिलेनाक्षयमिच्छतश्च वित्तम् ॥
उत्कृष्ट लक्ष्मी की इच्छा करने वाला अपने शत्र को रुधिर से पान देवे, गुणवान् पुत्रों की इच्छा करने वाले घृत से, अपरिमित धन की इच्छा करने वाले जल से, पाप (बधादि) से अर्थसिद्धि चाहने वाले घोड़ी
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