परतो न विशेषफलं विषमसमस्थास्तु पापशुभफलदाः । कैश्चिदफलाः प्रदिष्टाविंशत्परता ७ श्रमिति यावत् ॥
तीस अंगुल के बाद विशेष फल नहीं होता, किन्तु सामान्य रूप से विषम अंगुल में व्रण हो तो अशुभ और संम में शुभ फल कहना चाहिये। कोई-कोई (पराशर आदि आचार्य) तीस अंगुल के बाद अप्रभाग तक फलरहित बताते हैं।
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