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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 2
श्रीवृक्षवर्धमानातपत्रशिवलिङ्गकुण्डलाब्जानाम् सदृशा व्रणाः प्रशस्ता ध्वजायुधस्वस्तिकानां च ॥
चल, वर्षमान, छत्र, शिर्वालङ्ग, कुण्डल, कमल, पताका, खड्ग और शुभ वस्तुओं काजल ( चिह) प्रशस्त होता है।
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