बाईसवें अंगुल में व्रण हो तो घन का लाभ, तेईसवें में मृत्यु, चौबीसवें में धनलाभ, पच्चीसर्वे में मरण, छब्बीसवें में सम्पत्ति, सत्ताईसवें में निर्धनता, अट्ठाईसवें में ऐश्वर्य, उनतीसवें में मरण और तीसवें अंगुल में व्रण हो तो राज्यलाभ होता है।
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