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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 15
जङ्घामध्ये गुल्फे पार्ष्या पादे तदङ्गुलीष्वपि च। ष‌ड्विंशतिकाद् यावत्त्रिंशदिति मतेन गर्गस्य ॥
जङ्घाओं के मध्य भाग का स्पर्श करे तो छब्बीसवें अङ्गुल में, गुल्फ (टखना = पाँव की गांठी) का स्पर्श करे तो सत्ताईसवें अङ्गुल में, एंड़ी का स्पर्श करे तो अट्ठाइसवें अङ्गल में, पाँव का स्पर्श करे तो उन्तीसवें अङ्गल में और पाँव को अङ्गुली का स्पर्श करे तो तीसर्वे अङ्गुल में व्रण कहना चाहिये। यह गर्गाचार्य के मत से कहे गये हैं।
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