जङ्घाओं के मध्य भाग का स्पर्श करे तो छब्बीसवें अङ्गुल में, गुल्फ (टखना = पाँव की गांठी) का स्पर्श करे तो सत्ताईसवें अङ्गुल में, एंड़ी का स्पर्श करे तो अट्ठाइसवें अङ्गल में, पाँव का स्पर्श करे तो उन्तीसवें अङ्गल में और पाँव को अङ्गुली का स्पर्श करे तो तीसर्वे अङ्गुल में व्रण कहना चाहिये। यह गर्गाचार्य के मत से कहे गये हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।