स्तन का स्पर्श करे तो चौदहवें अङ्गुल में, हृदय का स्पर्श करे तो पन्द्रहवें अङ्गुल में, पेट का स्पर्श करे तो सोलहवें अङ्गुल में, कुक्षि का स्पर्श करे तो सत्रहवें अङ्गल में, नाभि का स्पर्श करे तो अट्ठारहवें अङ्गल में, नाभि के मूल का स्पर्श करे तो उन्नीसवें अङ्गल में, कटिप्रदेश का स्पर्श करे तो बीसवें अङ्गल में और गुहा स्थान का स्पर्श करे तो इक्कीसवें अङ्गुल में व्रण कहना चाहिये।
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