मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 13
स्तनहृदयोदरकुक्षिनाभौ तु चतुर्दशादयो ज्ञेयाः । नाभीमूले कट्यां गुह्ये चैकोनविंशतितः ॥
स्तन का स्पर्श करे तो चौदहवें अङ्गुल में, हृदय का स्पर्श करे तो पन्द्रहवें अङ्गुल में, पेट का स्पर्श करे तो सोलहवें अङ्गुल में, कुक्षि का स्पर्श करे तो सत्रहवें अङ्गल में, नाभि का स्पर्श करे तो अट्ठारहवें अङ्गल में, नाभि के मूल का स्पर्श करे तो उन्नीसवें अङ्गल में, कटिप्रदेश का स्पर्श करे तो बीसवें अङ्गल में और गुहा स्थान का स्पर्श करे तो इक्कीसवें अङ्गुल में व्रण कहना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें