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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 12
नासौष्ठकपोलहनुश्रवणप्रीवांसके च पश्चाद्याः । उरसि द्वादशसंस्थस्त्रयोदशे कक्षयोज्ञेयः ॥
नासिका का स्पर्श करे तो पञ्चम अङ्गुल में, ओठ का स्पर्श करे तो छठे अद्भुत में, गाल का स्पर्श करे तो सप्तम अङ्गल में, ठोड़ी का स्पर्श करे तो अष्टम अद्भुत में, कान का स्पर्श करे तो नवम अद्भूत में, गरदन का स्पर्श करे तो दशम अद्भुत में, कन्चे का स्पर्श करे तो एकादश अङ्गुल में, छाती का स्पर्श करे तो बारहवें अङ्गुल में और कोखों का स्पर्श करे तो तेरहवें अङ्गुल में व्रण कहना चाहिये।
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