नासौष्ठकपोलहनुश्रवणप्रीवांसके च पश्चाद्याः । उरसि द्वादशसंस्थस्त्रयोदशे कक्षयोज्ञेयः ॥
नासिका का स्पर्श करे तो पञ्चम अङ्गुल में, ओठ का स्पर्श करे तो छठे अद्भुत में, गाल का स्पर्श करे तो सप्तम अङ्गल में, ठोड़ी का स्पर्श करे तो अष्टम अद्भुत में, कान का स्पर्श करे तो नवम अद्भूत में, गरदन का स्पर्श करे तो दशम अद्भुत में, कन्चे का स्पर्श करे तो एकादश अङ्गुल में, छाती का स्पर्श करे तो बारहवें अङ्गुल में और कोखों का स्पर्श करे तो तेरहवें अङ्गुल में व्रण कहना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।