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बृहत्संहिता • अध्याय 50 • श्लोक 10
अथवा स्पृशति यदङ्गं प्रष्टा निस्त्रिशभृत्तदवचार्य । कोशस्थस्यादेशपणे व्रणोऽस्ति शास्त्रं विदित्वेदम् ॥
यदि कोई खड्‌गधारी पुरुष आकर प्रश्न करे कि 'इस खड्ग में व्रण है या नहीं' तो उस समय वह प्रश्नकर्ता जिस अङ्ग का स्पर्श करता हो, उसको निश्चय करके वक्ष्यमाण शाख को जान कर कोशस्थित खड्ग में व्रण कहना चाहिये ।
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