पचास अङ्गुल प्रमाण वाला खड्ग उत्तम, पच्चीस अङ्गुल का अधम और पच्चीस अङ्गुल से पचास अङ्गुल के भीतर का खड्ग मध्यम होता है। अङ्गुलमान को लेकर विषम पर्व पर स्थित व्रण अशुभ है, जैसे-प्रथम, तृतीय, पञ्श्चम आदि विषम अङ्गुल पर आगे कथित लक्षणयुत व्रण हो तो अशुभ होता है।
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