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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 94
परिवेषो रुक्पीडां दिग्दाहो नृपभयं च साग्निभयं । रूक्षो वायुः प्रबलश्चौरसमुत्थं भयं धत्ते ॥
यदि परिवेष हो तो रोगों से परेशानी होगी। आग (युद्ध के ज्वलनशील पदार्थ) लगने पर राजाओं से खतरा और आग से खतरा होगा। यदि भयंकर और तूफ़ानी हवा चले तो चोरों का भय उत्पन्न होगा।
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