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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 9
वृक्षस्य स्वच्छाया यथा एकपार्श्वे भवति दीर्घचया । निशि निशि तद्वद् भूमेः आवरणवशाद् दिनेशस्य ॥
जिस प्रकार सूर्य की गति के कारण पेड़ की छाया एक तरफ बढ़ती जाती है, उसी प्रकार पृथ्वी की छाया भी हर रात अपनी परिक्रमा के दौरान सूर्य को छिपा लेती है।
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