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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 85
वामः तु कुक्षिभेदो यद्युत्तरमार्गसंस्थितो राहुः । स्त्रीणां गर्भविपत्तिः सस्यानि च तत्र मध्यानि ॥
यदि राहु चंद्रमा को मुक्त करते समय कक्षा के उत्तरी भाग पर स्थित हो, तो इसे वामकुक्षिभेद कहा जाता है। महिलाओं को गर्भपात का कष्ट होगा तथा फसल मध्यम ही होगी।
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