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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 81
हनुकुक्षिपायुभेदा द्विः द्विः संछर्दनं च जरणं च । मध्यान्तयोश्च विदरणमिति दश शशिसूर्ययोः मोक्षाः ॥
सूर्य या चंद्र ग्रहण की मुक्ति या अंत दस प्रकारों में से एक है - (1) दक्षिणहनु (2) वामाहनु (3) दक्षिणकुक्षी (4) वर्ण कुक्षी (5) दक्षिणपायु (6) वामपायु (7) संछारण (8) जरण (9) मध्यविदरण और (10) अंत्यविदरण।
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