ग्रस्ते क्रमान् निमित्तैः पुनः ग्रहो मासषट्कपरिवृद्ध्या ।
पवनौल्कापातरजः क्षितिकंपतमोऽशनिनिपातैः ॥
यदि ग्रहण के समय (चाहे सूर्य हो या चंद्र) तेज हवा, उल्कापात, धूल भरी आंधी, भूकंप, पूर्ण अंधकार या वज्रपात हो, तो ग्रहण 6, 12, 18, 24, 30 और 36 महीने के बाद क्रमशः दोबारा होगा।
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