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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 54
हरिते रोगौल्बणता सस्यानामीतिभिश्च विध्वंसः । कपिले शीघ्रगसत्त्वम्लेच्छध्वंशोऽथ दुर्भिक्षम् ॥
यदि राहु का रंग तोते जैसा हो तो रोगों का प्रकोप होगा तथा अतिवृष्टि आदि से फसलें नष्ट होंगी; जब रंग लाल या मटमैला हो तो म्लेच्छ और ऊँट जैसे तेज़ पैरों वाले जानवरों को कष्ट होगा और अकाल पड़ेगा।
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