अवमर्दनमिति निःशेषमेव संछाद्य यदि चिरं तिष्ठेत् ।
हन्यात् प्रधानभूपान् प्रधानदेशांश च तिमिरमयः ॥
जब राहु पूरे चक्र को छिपा लेता है और काफी लंबे समय तक उस स्थिति में रहता है, तो इसे अवमर्दन कहा जाता है और इसका परिणाम प्रमुख राजाओं और महत्वपूर्ण देशों का विनाश होगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।