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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 43
सव्यापसव्यलेहग्रसननिरोधावमर्दनारोहाः । आघ्रातं मध्यतमः तमोऽन्त्य इति ते दश ग्रासाः ॥
ग्रहण दस प्रकार के होते हैं, जैसे सव्य, अपसव्य, लेह, ग्रासन, निरोध, अवमर्दन, आरोह, अघ्रत, मध्यतम और थामोन्त्य।
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