मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 3
मुखपुच्छविभक्तांगं भुजंगमाकारमुपदिशन्त्यन्ये । कथयन्त्यमूर्तमपरे तमोमयं सैंहिकेयाख्याख्यम् ॥
विद्वानों के एक संप्रदाय का कहना है कि राहु - सिंहिक का पुत्र - एक सर्प के आकार का है जिसका केवल चेहरा और पूंछ है; जबकि दूसरे वर्ग का मानना है कि वह निराकार है और शुद्ध अंधकार की प्रकृति का है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें