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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 29
कर्षकपाखण्डि वणिक्क्षत्रियबलनायकान् द्वितीयांशे । कारुकशूद्रम्लेच्छान् खतृतीयांशे समन्त्रिजनान् ॥
द्वितीय मण्डल में ग्रहण होने पर कृषक, विधर्मी, व्यापारी, क्षत्रिय, सेनापति, ये नष्ट हो जायेंगे। तीसरे भाग में पड़ने वाला ग्रहण कारीगरों, कलाकारों, शूद्रों, म्लेच्छों और मंत्रियों को कष्ट देगा।
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