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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 27
ग्रस्तावुदितास्तमितौ शारदधान्यावनीश्वरक्षयदौ । सर्वग्रस्तौ दुर्भिक्षमरकदौ पापसन्दृष्टौ ॥
यदि सूर्य या चंद्रमा ग्रहण के समय उगते या अस्त होते हैं, तो शरत् ऋतु की फसलें नष्ट हो जाएंगी और भूमि के राजाओं को कष्ट होगा। यदि ऐसा पूर्ण ग्रहण हो और ग्रहण चक्र पर पाप ग्रहों की दृष्टि भी हो तो पूरे देश में अकाल और महामारी फैल जाएगी।
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