अवनत्याऽर्के ग्रासो दिग्ज्ञेया वलनया अवनत्या च ।
तिथ्यवसानाद् वेला करणे कथितानि तानि मया ॥
सूर्य के ग्रहण का परिमाण चंद्रमा के विक्षेपण (लंबन) द्वारा निर्धारित किया जाना है। ग्रहण किस दिशा में शुरू होता है इसका पता चंद्रमा के विक्षेपण और कोणों के माध्यम से लगाया जाता है जिन्हें अयानवलन और अक्षवलन कहा जाता है। सूर्य और चंद्रमा के संयोग के सटीक समय को लिख करके ग्रहण का वास्तविक समय पता लगाना होगा। इनका वर्णन मेरे खगोलशास्त्रीय कार्य पंच सिद्धांतिका में विस्तार से किया गया है।
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