मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 17
पंचग्रहसंयोगान् न किल ग्रहणस्य संभवो भवति । तैलं च जलेऽष्टम्यां न विचिन्त्यमिदं विपश्चिद्भिः ॥
यह कहना सही नहीं है कि जब तक पांच ग्रह एक साथ नहीं आते तब तक ग्रहण नहीं हो सकता; विद्वानों का यह मानना भी गलत है कि पिछली अष्टमी के दिन पानी की सतह पर डाली गई तेल की एक बूंद की जांच करके ग्रहण और उसकी विशेषताओं का अनुमान लगाया जा सकता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें