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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 16
न कथंचिदपि निमित्तैः ग्रहणं विज्ञायते निमित्तानि । अन्यस्मिन् अपि काले भवन्त्यथौत्पातरूपाणि ॥
किसी भी प्रकार से ग्रहण का पता पूर्वसूचना रूपी लक्षणों से नहीं लगाया जा सकता। क्योंकि, ये उत्तरार्द्ध, अर्थात् उल्काओं का गिरना आदि, अन्य समय पर भी होते हैं।
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