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बृहत्संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 11
चन्द्रोऽधःस्थः स्थगयति रविमंबुदवत् समागतः पश्चात् । प्रतिदेशमतश्चित्रं दृष्टिवशाद् भास्करग्रहणम् ॥
पश्चिम से आगे बढ़ता हुआ चंद्रमा एक बादल की तरह नीचे से सूर्य चक्र को छिपा लेता है। इसलिए ग्रहण वाली चक्र की दृश्यता के अनुसार विभिन्न देशों में सूर्य ग्रहण अलग-अलग होता है।
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