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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 86
अनेनैव विधानेन हस्त्यश्चं स्नापयेत्ततः । तस्यामयविनिर्मुक्तं परां सिद्धिमवाप्नुयात् ॥
जो राजा इस पूर्वोक्त विधि से हाथी और घोड़ों को भी अभिषेक कराता है, रोग से मुक्त होकर उसके वे हाथी-घोड़े परम सिद्धि प्राप्त करते हैं।
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