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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 84
अधिराज्यार्थिनो राज्ञः पुत्रजन्म च काङ्क्षतः । तत्पूर्वमभिषेके च विधिरेष प्रशस्यते ॥
महाराजाधिराज पद की और पुत्र की इच्छा करने वाले राजा को उसके प्रथम अभिषेक में भी यही विधि प्रशस्त है।
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