अधिराज्यार्थिनो राज्ञः पुत्रजन्म च काङ्क्षतः । तत्पूर्वमभिषेके च विधिरेष प्रशस्यते ॥
महाराजाधिराज पद की और पुत्र की इच्छा करने वाले राजा को उसके प्रथम अभिषेक में भी यही विधि प्रशस्त है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।