राष्ट्रोत्पातोपसर्गेषु राहोः केतोश्च दर्शन । ग्रहावमर्दने चैव पुष्यस्नानं समाचरेत् ॥
राज्य में किसी प्रकार का उत्पात या उपसर्ग (उपद्रव) होने पर तथा केतु का दर्शन होने पर पुष्यस्नान करना चाहिये।
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