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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 81
एतत्प्रयुज्यमानं प्रतिपुष्यं सुखयशोऽर्थवृद्धिकरम् । पुष्याद्विनार्धफलदा पौषी शान्तिः परा प्रोक्ता ॥
प्रत्येक पुष्य नक्षत्र में किया हुआ यह स्नान सुख, यश और धन की वृद्धि करने बाला होता है। पुष्य नक्षत्र को छोड़कर अन्य नक्षत्र में यथाविधि यह स्नान करने से आधा फल देने भाला होता है। पर पुष्य नक्षत्रयुत पूर्णिमा के दिन का यह स्नान सर्वोत्कृष्ट है।
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