प्रजाओं को अभयदान देकर बध्य स्थानगत पशु (छाग) आदि को छोड़कर अभ्यन्तर (राजा के शरीर या अन्तःपुर) में जिन्होंने अपराध किया है, उनके सिवाय समस्त बन्धन स्थानस्थित पुरुषों को मुक्त करे।
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