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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 76
मुख्यस्थाने जुहुयात् पुरोहितोऽग्निं समितिलपृताद्यैः । त्रिनयनशक्रबृहस्पतिनारायणनित्यगति‌ग्भिः
पुरोहित मुख्य स्थान (दक्षिण स्थान में लकड़ी, तिल, गृह आदि से स, इद, विष्णु और सम्बन्धी ऋचा पढ़ कर अग्नि में आहुति है।
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