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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 75
वृषस्य वृषदंशस्य रुरोध पृषतस्य च। तेषामुपरि सिंहस्य व्याप्रस्य च ततः परम् ॥
जैसे सबसे पहले बैल का, बाद में बिल्ली का, इसके बाद काले मृग का, इसके बाद हरिण का, इसके बाद सिंह का और अन्त में प्यान का चमड़ा रक्खे।
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