इत्येतै चान्यै श्चाप्यथर्वकल्पाहितैः
कौष्माण्डमहारौहिणकुबेरहद्यैः
सरुद्रगणैः ।
समृद्ध्या च ॥
इन मन्त्रों के अतिरिक्त अथर्वकल्प में कथित मन्त्रों से, रुद्रगण ('एकदशानुवाका रुद्राः' ), कौष्माण्ड ( 'घडनुवाका मरुदणाः'), महारोहिण और कुबेरहदय नामक ऋचा से अभिषेक करें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।