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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 70
इत्येतै चान्यै श्चाप्यथर्वकल्पाहितैः कौष्माण्डमहारौहिणकुबेरहद्यैः सरुद्रगणैः । समृद्ध्या च ॥
इन मन्त्रों के अतिरिक्त अथर्वकल्प में कथित मन्त्रों से, रुद्रगण ('एकदशानुवाका रुद्राः' ), कौष्माण्ड ( 'घडनुवाका मरुदणाः'), महारोहिण और कुबेरहदय नामक ऋचा से अभिषेक करें।
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