मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 7
कुसुमरसपानमत्तद्विरेफपुंस्कोकिलादिभिश्चान्यैः विरुते वनोपकण्ठे क्षेत्रागारे शुचावथवा ॥
इन पक्षियों के शब्दों से युक्त पुष्पों के रसास्वादन से मत्त प्रमर, श्रेष्ठ कोकिल आदि और अन्य सुन्दर पक्षियों के शब्दों से युत वन के समीम् शुद्ध पुण्यभूमि में पुष्यस्नान करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें