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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 68
अग्नयः पितरस्तारा जीमूताः खं दिशो जलम्। एते चान्ये च बहवः पुण्यसङ्कीर्तनाः शुभैः ॥
सभी उत्पातों का नाश करने वाले, पवित्र गल से जिस तरह प्रसम चित
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