द्वैपायनो यवक्रीतो देवराज सहानुजः । पर्वतास्तरवो वल्ल्यः पुण्यान्यायतनानि च ॥
गौ, विश्व की मातायें, दिव्य वाहन, चराबर समस्त लोक, अग्नि, पितर, तारा, मेप, आकाश
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