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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 63
भृगुः सनाकुमार सनकोऽय सनन्दनः । संবারবা दक्षध जैगीषव्यो भगन्दरः ॥
, दुर्वाररा, दुर्विनीत, कण्व, कात्यायन, मार्कण्डेय, दीर्घतप, शुनःशेप, विदूरथ,
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