सर्वे त्वामभिषिञ्छन्तु कालस्यावयवाः शुभाः। एते चान्ये च मुनयो वेदव्रतपरायणाः ॥
ब काल के शुभ अवयव तुम्हारा अभिषक करें। ये सब तथा अन्य भी वेदव्रर्तपरायण, शिष्य और खियों के साथ तपस्यीगण तुम्हारा अभिषेक करें।
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