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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 59
पक्षाहोरात्रसन्धयः । नक्षत्राणि मुहूर्ताक्ष संवत्सरा दिनेशाध कलाः काष्ठाः क्षणा लवाः ॥
अहोरात्र को सन्धि, संवत्सर, सूर्यादि सात ग्रह, कला, काष्ठा, क्षण, लव-ये सब काल के शुभ अवयव तुम्हारा अभिषक करें।
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