मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 57
अदितिर्देवमाता च स्वाहा सिद्धिः कीर्तिर्लक्ष्मीधृतिः श्रोध सिनीवाली कुरुस्तथा। दनुध सुरसा चैव विनता कहुरेव च ॥
देवमाता, स्वाहा, सिद्धि, सरस्वती, कीर्ति, लक्ष्मी, घृति, श्री, सिनीवाली (दृश्यचन्द्रा ), कुहू (अदृश्यचन्द्रा अमावस्या), दनु, सुरसा, विनता, कडू, देवपत्री
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें