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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 52
आज्यं तेजः समुद्दिष्टमाज्यं पापहरं परम्। आज्यं सुराणामाहार आज्ये लोकाः प्रतिष्ठिताः ॥
भूत तेज है, घृत प्रकृष्ट पाप का नाश करने वाला है। घृत देवताओं का आहार है। पूत में लोक (भू: आदि) स्थापित हैं, भौम (चराचरोद्भव),
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