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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 50
अहतक्षौमनिवसनं पुरोहितः कम्बलेन सन्धाय । कृतबलिपूर्ण कलशेरभिषिक्षेत्, सर्पिषा पूर्णः ॥
नथीन रेशमी धरख पहने हुये और कर लिया है बलि और पूजा जिसने, ऐसे राजा को कम्बल से आध्यादित करके पुरोहित पूर्ण कलम से अभिषेक करे ॥
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