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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 49
वन्दिजनपौरविप्रैः प्रपुष्टपुण्याहवेदनिर्घोषैः । समृदङ्ग शङ्ख तूर्यैर्मङ्गलशब्दैर्हतानिष्टः ॥
बन्दिजन, पुरवासी तथा ब्राह्मणों के द्वारा उ‌द्घोषित पुण्याह शब्द, वेदध्वनि, मृदङ्गद्ध, शङ्ख और तुरही के मङ्गल शब्दों से नष्ट हो गया है अनिष्ट जिसका, ऐसा राजा उस आसन पर बैठे।
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