मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 46
भद्रासनमेकतमेन कारितं कनकरजतताम्राणाम् । क्षीरतरुनिर्मितं वा विन्यस्यं चर्मणामुपरि ॥
चमड़े के ऊपर सोना, चाँदी, ताँचा या दुर्घले वृक्ष का बना हुआ सुन्दर आसन विद्यावे। इस भद्रासन की ऊँचाई तीन प्रकार (एक हाथ पादाधिक हस्त तीस अंगुल और देख हाथ) की होनी चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें