भद्रासनमेकतमेन कारितं कनकरजतताम्राणाम् । क्षीरतरुनिर्मितं वा विन्यस्यं चर्मणामुपरि ॥
चमड़े के ऊपर सोना, चाँदी, ताँचा या दुर्घले वृक्ष का बना हुआ सुन्दर आसन विद्यावे। इस भद्रासन की ऊँचाई तीन प्रकार (एक हाथ पादाधिक हस्त तीस अंगुल और देख हाथ) की होनी चाहिये।
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