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बृहत्संहिता • अध्याय 48 • श्लोक 41
ब्राह्मों क्षेमामां चैव सर्वबीजानि काञ्चनीम्। मङ्गल्यानि यथालाभं सर्वोषध्यो रसास्तथा ॥
ब्राह्मी, क्षेमा (काष्ठगुग्गुल), अजा (औषधिविशेष), सब प्रकार के बीज, काछनो ( हलदी हरदो, 'निद्रा काशनी पीता हरिद्रा वरवर्णनो'त्यमरः), अन्य मङ्गल द्रव्य ( दधि, अक्षत, पुष्प आदि)-इन द्रव्यों में जितने की प्राप्ति हो, उतने ही लेना चाहिये। सब औषधि, सब रस
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